वो बारिश की बूँदें आज भी कुछ याद दिला जाती हैं 
वो ठंडी हवाओं में साथ  घूमना
वो चाट के ठेले पर गोल  गप्पे  खाना 
वो बरसात में स्कूटी तेज़  तेज़  चलाना 
वो क्लास  में टिफिन खाना
वो भूगोल शास्त्र की क्लास  से भाग  जाना 
वो पानी पीने के बहाने पूरे स्कूल  के चक्कर काटना 
वो मिल बाँट के खाना 
वो कैंटीन के बाहर खड़े हो कर लड़ना 
वो बास्केटबाल  के लिए झगड़ना 
हर लम्हा हर पल  बस  मस्ती कर 
वो खट्टी मीठी यादें आज  भी आँखों में आंसू दे जाती हैं       
                                                   -हर्षिता श्रीवास्तव 

10 Replies to “यादें”

  1. हिंदी कविता में स्वागत है…अच्छी रचना है…थोडा करेक्शन कर दूं…अगर बुरा ना मानो…नुक्ताचीनी की बुरी आदत है…

    वो खट्टी-मीठी यादें, बारिश दे जातीं हैं
    आज भी, आँखों में…

  2. loved it Harshita (hindi was my third language 😛 )…i was in this too … i wrote in bengali n a lil bit in english…i started blogging initially with few of them…now i hardly get time for that 🙁

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